क्या मृत्यु के बाद अपने प्रियजन से बात हो सकती है? जानिए सच!

मृत्यु अटल सत्य है इसके बावजूद इन्सान को अपनी या अपने किसी प्रिय व्यक्ति की मौत की खबर अन्दर तक हिला देती है। ऐसे में किसी अपने को खोने पर सवाल आता है की क्या मृत्यु के बाद अपने प्रियजन से बात हो सकती है?

मृत्यु के बाद परिजन से बात

ये सवाल इन्सान के मन में इसलिए भी छाया रहता है क्योंकि कुछ ऐसे लोग हैं जो इस बात का दावा करते हैं की कुछ विधियों का प्रयोग करके मरने के बाद भी इन्सान की आत्मा से बात की जा सकती है?

हालाँकि इस बात में कितना सच और कितना झूठ है ये आप शायद तभी जान पायेंगे जब आपको मालूम होगा आत्मा के बारे में कृष्ण भगवान क्या कहते हैं? और शास्त्रों में इस बारे में क्या लिखा है?

बता दें इससे पहले हम आत्मा क्या है? आत्मा कैसे बदला लेती है? इन विषयों पर बारीकी से चर्चा कर चुके हैं और आज का विषय थोडा सा रोचक होने वाला है। चलिए जानते हैं की

क्या मृत्यु के बाद अपने प्रियजन से बात हो सकती है? या सिर्फ अफवाह!

दिल के करीबी व्यक्ति का छोड़ जाना वाकई दर्दनाक होता है लेकिन इस भ्रम में रहना की उसके जाने के बाद उससे मैं किसी तरह बात कर पाऊंगा ऐसा सम्भव नहीं है।

कोई अगर आपको कहता है की मौत के बावजूद किसी इन्सान से बात कर उसके दिल का हाल जाना जा सकता है तो समझ लीजिये वो झूठ है।

अगर आप उस बात को सच मानकर जीने लगोगे तो आपको जिन्दगी में बड़ी तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है।

क्योंकि ऐसी उम्मीद रखना की आज नहीं तो कल जो व्यक्ति मुझे छोड़कर गया है वो मुझसे बात करेगा। ये बहुत झूठी उम्मीद है।

तो ये बात एकदम मन से निकाल दीजिए। हालाँकि अगर मन में अब आपके ये सवाल है की कई लोग तो आत्मा से बात करते हैं तो भला हम क्यों नहीं कर सकते।

तो देखिये आत्मा से बात की जा सकती है या नहीं ये फैसला आप खुद ले लेंगे बस आप एक बार जान लीजिये वास्तव में आत्मा आखिर है क्या।

आत्मा क्या है? मरने के बाद आत्मा से बात कैसे होती है?

देखिये आत्मा को समझने के लिए आपको उस ग्रन्थ को पढना होगा जहाँ आत्मा शब्द की चर्चा की गई है। बता दें आत्मा शब्द ऋषियों की वाणी से मुखरित हुआ था।

और अगर आप भगवदगीता और उपनिषदों को पढेंगे तो आपको वहां मालूम होगा की आत्मा की अनेकों बार चर्चा की गई है।

भगवदगीता के अध्याय 2 के श्लोक 23 में आत्मा के विषय पर भगवान कृष्ण कहते हैं

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥

अर्थात ये जो आत्मा है इसका न तो कभी जन्म हुआ और न ही कभी इनका अंत होगा। ये अविनाशी है, अजन्मा है, अजर है, अमर है। शरीर मर भी जाए तो आत्मा तब भी बनी रहती है।

इसी श्लोक को पढ़कर समझ गए होंगे की आत्मा तो शाश्वत है जो मनुष्य के जन्म से पहले भी था और उसके बाद भी रहेगा।

अब थोडा ठहरिये। और विचार कीजिये की इस संसार में क्या है? जो कभी मिट नहीं सकता, जिसे कभी भी नष्ट नहीं किया जा सकता जो हमसे पहले भी था हमारे बाद भी रहेगा।

जवाब खोजना थोडा मुश्किल होगा क्योंकि सच्चाई तो ये है की प्रकृति में जो कुछ भी हम देख रहे हैं वो सब एक दिन नष्ट हो जायेगा यहाँ तक की हम भी नष्ट हो आएंगे।

तो मात्र सत्य है जो बचा रहेगा। जो हमसे पहले भी था हमारे बाद भी रहेगा जिसकी न कोई सीमा है न कोई आकार या रंग रूप, उसी को भगवदगीता में आत्मा कहा गया है।

जबकि अगर आप उपनिषदों को पढें तो वहां पर इसी सत्य को ब्रह्म भी कहा गया है। माण्डुक्य उपनिषद में ऋषि कहते हैं अयं आत्मा ब्रह्म यानी ये जो आत्मा है यही ब्रह्म है।

तो संक्षेप में कहें तो आत्मा कोई पारलौकिक चीज़ नहीं है, सत्य यानि सच्चाई का ही एक नाम है आत्मा। और उसी सत्य को हम अलग अलग तरह से परिभाषित कर देते हैं।

कभी हम कह देते हैं सत्य ही सुन्दर है तो कभी कह देते हैं राम नाम ही सत्य है। यानी हम कह सकते हैं की इन्सान सच्चाई के पथ पर चल सके इसके लिए आत्मा शब्द का उपयोग किया गया।

हालाँकि ये बात और है की हमने स्वार्थ और अज्ञान के कारण आत्मा शब्द का गलत उपयोग कर दिया।

क्या आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में जाती है

बहुत से लोग हैं जो ये कहते हैं की इन्सान के मरने के बाद उसके शरीर से एक रोशनी निकलते हुए आसमान में चली जाती है, कुछ हैं जो कहते हैं मरने के बाद धुंवा उठते हुए ऊपर की तरफ निकल जाता है।

पर सच तो ये है की ऐसा कुछ भी नहीं होता है, और इसका सबूत ये है की अँधेरे में मृत किसी व्यक्ति को देख लीजिये कोई दिव्य ज्योति उसके शरीर से नहीं निकलती।

जी हाँ, अगर मरने के बाद कुछ ऐसा होता तो स्वयं विज्ञान इसकी पुष्टि करता। अब ये सुनकर कुछ लोग सोचते हैं की फिर मरने के बाद बच्चे में आत्मा कैसे प्रवेश करती है?

आत्मा कोई ऑक्सीजन थोड़ी है जो किसी के शरीर में प्रवेश कर जाए, स्वयं सोचिये क्या सच्चाई किसी के शरीर में घुसती है नहीं न, इसके बावजूद सच्चाई तो होती है।

बच्चे के पैदा होने में आत्मा का कोई रोल नहीं है, आत्मा की वजह से बच्चे में प्राण नहीं आते। ठीक वैसे जैसे एक बीज में प्राण उसको खाद पानी देने से आते हैं न और वो एक पौधा बनता है।

उसी तरह पुरुष के शुक्राणुओं और महिला के अंडाणु से जो जीव पैदा होता है उसी से उसमें प्राण आ जाते हैं।

पर प्रकृति में इतने सारे पेड़ पौधे उगते हैं और नष्ट होते हैं हम नहीं कहते की आत्मा के कारण वो उग रहे हैं लेकिन जब इन्सान की बात आती है तो हम भूल जाते हैं की हम भी तो प्रकृति का ही हिस्सा हैं न।

जो व्यक्ति ये समझ गया की प्रकृति में जन्म मरण चलता रहता है, सच्चाई का इन चीजों से कोई लेना देना नहीं ऐसा व्यक्ति फिर आत्मा के नाम पर मूर्खतापूर्ण बातें नहीं करता।

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अंतिम शब्द

तो साथियों इस लेख को पढने के बाद क्या मृत्यु के बाद अपने प्रियजन से बात हो सकती है? इस प्रश्न का सटीक उत्तर अब आप जान गए होंगे।

इस लेख को पढने के बाद किसी तरह का सवाल बाकी है तो इस हेल्पलाइन नम्बर 8512820608 पर भेजें, साथ ही लेख को अधिक से अधिक शेयर कर दें।

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