Acharya Prashant Books Summary in Hindi

प्रेम प्रेम सब कहे प्रेम न जाने कोय कबीर साहब की यह पंक्ति स्पष्ट तौर पर समझाती हैं की हजारों वर्षों से लोगो द्वारा प्रेम का विकृत अर्थ कर हमेशा प्रेम शब्द की अवमानना की है, आज भी समाज में प्रेम के नाम पर जो हरकतें होती हैं उसका नकरात्मक प्रभाव समाज के हर वर्ग पर पड़ता है। विशेषकर नयी पीढ़ी पर।

और इस स्तिथि को बदलने के लिए आचार्य जी द्वारा जनमानस तक अपने विचारों को पहुंचाने की भरपूर कोशिश की गई है, आज उनकी शिक्षाओं एवम प्रेरणाओं से लाखों लोगो का जीवन बदला है।

और आचार्य जी द्वारा रचित प्रेम सीखना पड़ता है? नामक यह पुस्तक हमें प्रेम के वास्तविक मर्म को बतलाती है! साथ ही प्रेम शब्द को लेकर जो भ्रांतियां हमारे भीतर हैं उन्हें भी खत्म करती हैं।

तो चूँकि बिना प्रेम जीवन रसहीन है, बेरंग है इसलिए प्रेम नामक यह पुस्तक हर उस शक्श को पढनी चाहिए जो जीवन में सच्चा प्रेम पाकर लोगों के साथ बाँटना चाहता हो।

प्रेम सीखना पड़ता है

इस पुस्तक के सभी अध्याय निम्नलिखित हैं 👇

« प्रेम- सीखना पड़ता है| Chapter 1

« अध्याय -2 क्या प्रेम किसी से भी हो सकता है? प्रेम: सीखना पड़ता है?

« अध्याय 3 ~ कौन है प्रेम के काबिल ? 

« Chapter 4 सच्चे प्रेम की पहचान

« चिंता करते रहने को प्रेम नहीं कहते! Chapter 5

« प्रेम की भीख नहीं मांगते, न प्रेम दया में देते हैं Chapter 6

« प्रेम का नाम, हवस का काम | Chpater 7

« बेबी – बेबी वाला प्यार Chapter 8

« क्या प्रेम एक भावना है? Chapter 9

« रिश्तों में प्रेम क्यों नहीं है? Chapter 10

« क्या प्रेम की कोई परिभाषा नहीं होती? Chapter 12

« राधा- कृष्ण में भी प्रेम था, पर हमारे प्रेम को सम्मान क्यों नहीं?

« हम जिनसे प्रेम करते हैं, वो हमसे नफरत क्यों करते हैं? Chapter 13 

« प्यार है या कारोबार – अध्याय 14 | Full Summary in Hindi

« रिश्ते बिना प्रेम के नहीं चल सकते| अध्याय 15

« प्रेम और मोह में ये फर्क है | अध्याय 16

« क्या ख़ास लोगों से ख़ास प्रेम होता है? Chapter 17 Summary in Hindi

« प्रेम बिना जीवन कैसा | Chapter 18

« प्रेम में अशांति Chapter 19

« परिवार में प्रेम क्यों नहीं? Chapter 20 | Full Summary in Hindi